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Monday, August 23, 2010

मेरे नये एगरीगेटर पर आपका स्वागत है।

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मालीगांव
 साया


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Saturday, August 21, 2010

अजब -गजब की चिज है स्वाद बेमिसाल

आजकल बरसात का मौसम चल रहा है। और बाजरे की फसल उगी हुई है। इस फसल में खाने के लिए जो फल लगते है मैं आज आपको उन्हीं के बारे में रूबरू करवाने जा रहा हूं  (मौसमी फल)
     

  जी हां मैं बात कर रहा हूं बाजरे की फसल में लगने वाले फल काकड़ी,मतिरे,टिण्डे आदि की  इस मौसम में शायद ही काई एसा होगा जिसका मन काकड़ी मतिरे खाने को नही करता है।
 कल मुझे मेरे रिश्तेदार के यहाँ जाना पड़ गया वहां पर मैने एक अजब गज़ब चिज देखी वो थी ये काकड़ी जिसकी लम्बाई 2.6 फिट है। तथा मोटाई 9 इंची के व्यास में तथा इसका वजन 6.300 किलोग्राम है। इतनी लम्बी काकड़ी मैने तो अपने जीवन में पहली बार देखी है। शायद आप भी इसको पहली बार ही देख रहें होगें।
 मेरे रिस्तेदारों का गांव पड़ता हे नान का बास जो चुरू रोड़ पर है। नान (रिजाणी) उनके यहां ये बहुत लगते है। उन्होंन मुझे बुलाया था मैं आपको बता दूं मुझे इन्हें मोटरसाईकल पर एक कट्टे में बांधकर लाना पड़ा और कल पुरे दिन बारिश हो रही थी तो मुझे भी 40 की.मी. का सफर मोटरसाईकिल पर भिगते हुए भी
करना पड़ा एक साथ दो दो आनन्दमय अनुभव एक बारिश के सुहाने सफर का और दूसरी ये काकड़ि खाई और अपने परिवार वालों को भी लाकर खिलाई।  मैं वहा से काफी मात्रा में लेकर आया । वहां लगभग काकड़ी इसी लम्बाई की थी
 इन फलों के बारे में हमारे यहा एक लोक गीत भी बना है।
 मुझे अचरज हुआ इसको अगर 5-7 लोगों का परिवार काटकर खाये तो पेट भर कर खा सकता है। इसको खाने के बाद पुरे दिन भर और कुछ खाने की इच्छा ही  पैदा नहीं होती। मिठास इतना की पुछो मत अब आप कहोगें की आप तो हमारा मन ललचा रहे हो। नही ऐसी कोई बात नहीं है अगर आप भी खाना चाहते है आइये हमारे घर आपका स्वागत है। एक साथ मिल बांट कर स्वाद लेंगे इनको खाने का। अगर आपको कोरियर द्वारा भी भेजें जो कमबख़्त कोरियर वाला ही
इनको चट कर जायेगा। 
ये फोटों मैने मेरे मोबाईल द्वारा ही खिचे थे इनकी फोटो मैं आपको जरूर दिखाउगां नहीं तो आप कहोगे की मैं झुठ बोल रहा हूं। मैने सोचा क्यों न इस अजब गजब काकड़ी को आपके साथ खाकर तो शेयर नहीं कर सका कम से कम बता कर तो शेयर करू।
 फोटो मोबाईल से खिंचे होने के कारण हो सकता है शायद आपको पूरे साफ दिखाई न दे
परन्तु उस समय मेरे पास मोबाइल के अलावा और कोई साधन फोटो खिचने के लिए उपलब्ध नहीं था
                
       
बस अब काकड़ी को काट लिया है इससे आगे का हाल मैं आपको नहीं दिखा सकता भाई मुझे खाना भी तो है इसे
 इसी के साथ इजाजत दीजिए ....


 

  


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 साया
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Friday, August 20, 2010

चुनाव परिणाम

सबसे पहले आप सभी को मेरा सादर प्रणाम   
  जैसा कि मैने पहले की पोस्ट में आपसे वादा किया था की चुनाव परिणामों के साथ फिर आपके साथ हाजिर होऊगा  इसलिए आज चुनाव के परिणाम निकल आये है। जो आपके सामने हाजिर है। जैसा कि पहले की पोस्ट में बताया जा चुका है कि चार उम्मीदवार मैदान में थे तीन पार्टीयों से कांग्रेस,भाजपा,बसपा तथा एक निर्दलीय उम्मीदवार था  15 वार्डो वाली नगरपालिका का चुनाव 18 तारीख को सम्मपन हुआ था
         बगड़ नगरपालिका चुनाव का परिणाम आज प्रातः 9.30 बजे घोषित कर दिया गया जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार राजेन्द्र शर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेन्द्र कुमावत को 82 वोटों से पछाड़ देते हुए अपनी जीत हासिल कर ली है। लगातार कई वर्षो से बगड़ नगरपालिका का बोर्ड भाजपा का बनता आ रहा था इस बार निर्दलीय उम्मीद वार के रूप में श्री राजेन्द्र शर्मा ने जीत हाशिल की है। इस चुनाव से पहले राजेन्द्र शर्मा भी भाजपा के ही सदस्य व उम्मीदवार थे उन्हाने भाजपा से ही टिकट मांगा था लेकिन नहीं मिलने के कारण उन्हानें भाजपा से त्यागपत्र देकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और अपनी जीत हासिल की
           जीत की घोषणा के साथ ही जयकारों की गुंज के साथ विशाल जुलूस निकाला गया और श्री राजेन्द्र को उनके कार्यालय तक लाया गया और 11 बजे उनको नये चेयरमैन के रूप में शपथ दिलवाई जायेगी। श्री राजेन्द्र शर्मा पहले भी बगड़ नगरपालिका के दो बार चेयरमैन रह चुके है। और इस बार 82 वाटो से जीत कर तीसरी बार चैयरमैन पद की  शपथ ग्रहण करने जा रहें है।
         शायद उनकी चेयरमैन की खुशी में ही इन्द्र भगवान भी नन्ही नन्ही फुहारों से बगड़ नगरपालिका चेयरमैन का स्वागत कर रहें है इस समय बगड़ में बिल्कुल मन्द मन्द वर्षा हो रही हे। मौसम एकदम सुहाना हो रखा है।
अब उप चेयरमैन की चुनाव के लिए कस्मकस जारी है। देखते है कौन बन पाता है उप चेयरमैन
इससे पहले वार्ड पार्षद मिलकर ही चेयरमैन को चुनते थे इस बार सीधे मतदान प्रणाली द्वारा जनता द्वारा मतदान करवाकर चेयरमैन पद का चुनाव किया गया है।





हर्ष उल्लास का पर्व तीज


 साया
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Sunday, August 15, 2010

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

 सबसे पहले मैं आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहुंगा 

HAPPY 
INDEPENDENCE


                               DAY

मुझे आज आपको शुभकामनाएं देने में देर हो गई क्योंकि मैं आज सुबह सुबह अपने पास के एक विद्यालय गोगराज बगड़िया स्कूल बगड़ में फोटो खिचने के लिए चला गया, जाना पड़ता है, भाई हमारी रोजी रोटी (मजदूरी) का सवाल जो ठहरा अपना तो काम ही जो ठहरा फोटोग्राफी का, सो वहा बच्चों के प्रोग्राम देखकर उनकी फोटो खिंचकर बहुत आनन्द उठाया ।
 वहां की कुछ फोटो आपके साथ शेयर कर रहा हूं।

 इन बच्चो के नाचते देखते हुए तथा गाते देखते हुए मन बहुत खुश हुआ मुझे भी अपना बचपना याद आ गया
इन्हे देखकर वास्तव में लगता है, मानो ये बच्चे ही पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। बाकि  हम लोग तो सिर्फ घुट घुट कर जिये जा रहे है। इस स्वतंत्र भारत में, कारण चाहे महगाई हो या अन्य भष्टाचार बगेरह, लेकिन पूर्ण रूप से आजादी सिर्फ कहने को है। देश के हालात को देखकर घुटन सी महसूस होती है।

 

बच्चों  ने बहुत सुनदर प्रस्तुतिया दी। जिनमें राजस्थानी लोग गीतो,देश भक्ति गीत सामील थे ।
आल इज वेल
आदि अनेक लोक गीतों व राष्ट्र भक्ति गीतों के साथ यह दिवस आज मैने  बच्चों के संग मनाया और अब आपके साथ शेयर कर रहा हू।

 साया
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 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

Thursday, August 12, 2010

हर्ष उल्लास का पर्व तीज

सबसे पहले मैं ब्लॉग जगत के सभी पाठको ब्लॉग स्वामियों को आज के त्यौहार तीज की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूंगा
         यह त्यौहार सुख व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसलिए यह खुशी का त्यौहार व हर्ष उल्लास का का त्यौहार है। आज यह त्यौहार मात्र घर और अखबार के पन्नो पर ही सिमट कर रह गया है। बिल्कुल सुना सा लगता है आज यह त्यौहार है न कोई खुशी, न कोई मौज मस्ती, न झुले,न पिंग।  मुख्यतः लोग आज बस इसको अपना पेट भरने के लिए मनाते है। यानि घर में अच्छा खाना बना लिया और  तीज माता को भोग लगाया और गटक लिया मन गई तीज और वही रेलम पेल में मस्त काटने लगे अपनी जिन्दगी । हालाकि कुछ एक स्थानों जरूर इसे आज भी परम्परागत ढ़ग से मनाया जाता है,परन्तु वो बात कहा?
          अगर पुराने जमाने यानि आज से लगभग 8-10 वर्ष पूर्व को याद करें तो यह त्यौहार बहुत हर्ष हो उल्लास के साथ मनाया जाता था इस दिन बहन, बैटिया अपने अपने पीहर आ जाती थी और अपनी सखी सहेलियो से मिलती थी और गप-सप हांकती थी।
            सावन मास लगते ही बडे़- बडे़ वृक्षों की डालियों पर भारी-भारी रस्सों से झुले डाले जाते थें और बहन,बैटियां उन पर झुले झुलती थी और लोक गीत गाती थी बड़ा मनोरम दृश्य लगता था। जहां कही भी देखते वही डालियों पर झुले झुलते लोग दिखाई देते थे । लोगों में झुले झुलने (पींग) का कम्पीटीशन भी होता था झुला झुलने वाला कितनी उँचाई तक की पींग चढ़ा सकता है। कितना ऊंचा हिण्डा चढ़ा सकता है। दुसरा उससे भी ज्यादा चढ़ाने की कौशिस करता था बड़ा मजा आता था जगह जगह तीज माजा की सवारिया निकाली जाती थी       
             आज बस अखबार के एक छोटे से कोने में तीज सवारी का समाचार पढ़कर ही बस लोग तीज मना लेते है और सवारी में घर बैठे ही शामिल हो जाते है। ये कैसी विडम्बना है। मुझे तो लगता है ऐसे करते करते  ये हमारे त्यौहार लुप्त ही हो जायेगें? आज जब देखते है तो पार्को में लगे फ़िक्स झुलों के अलावा कही कोई झुला डला नजर नहीं आता है।  कहा गये वों झुला कम्पीटीशन करने वाले लोग, कहा गई वो मौज मस्ती कहा गये वो खुशी के दिन ? ये तो आप बुद्धिजीवी लोग ही बता सकते है।
 गणगौर पर्व के बाद 3-4 माह बाद यही त्यौहार आता है जो सब त्यौहार के आने का रास्ता साफ करता है इसके बारे में एक राजस्थानी कहावत भी है -
 ‘‘तीज त्यौहारा बावड़ी, ले डूबी गणगौर ’’  
       अर्थात गणगौर के डुबोने या गणगौर पर्व के कई दिनों के बाद तीज त्यौहार ही पहला त्यौहार आता है जो अन्य त्यौहारों के आने की सुचना व खुशीया हमें देता है।
   शायद लोगो की भावनाओं को समझकर ही सावन मास में निकलने वाली लाल रंग का जीव तीज जो अक्सर प्रायः जमीन पर चलता दिखाई दिया करता था आज लुप्त प्रायः सा हो गया है इसलिए मैं उसकी फोटो आपके समक्ष नहीं रख पाऊगां
      यह जीव बहुत ही कोमल होता है। और इतना मनभावन लाल रंग का होता है जमीन पर चलता बहुत ही अच्छा लगता आप ने इसे जरूर देखा होगा शायद यह त्यौहार इसी जीव के उपर मनाया ताजा है। इस त्यौहार के मनाने के बारे में  तो मैं ज्यादा नहीं बता पाऊगा

Wednesday, August 11, 2010

चुनावी सरगम

  दोस्तों आजकल हमारी नगरी बगड़ में नगरपालिका चुनाव क माहौल चल रहा है। आगामी 18 अगस्त 2010 को नगरपालिका अध्यक्ष पद व वार्ड पार्षदों के चुनाव होने हैं।  इसके लिए जहां भी देखें हर जगह चुनाव की ही चर्चा है। जिस किसी के मुँह से सुनते है एक ही बात फला उम्मीद वार के जीतने के चान्सेज ज्यादा है फला के कम फलां ने यह किया एसी ही बाते सुनने को मिलती है। और कोई बात नहीं। लोग
अपना काम धंधा छोड़कर चुनावी माहौल में रम गये है।
    
बगड़ नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए 9 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे थे लेकिन पांच ने फार्म उठा लिए और अब वर्तमान में चार दिग्गज अपनी किस्मत  आजमा रहे है।
उनमें है  -



1 कांग्रेस पार्टी से श्री राजेन्द्र प्रसाद कुमावत
बिजनेस मैन
2 भाजपा पार्टी से  श्री विक्रम सिंह शेखावत    

भू.पूर्व चेयरमैन
3 बसपा पार्टी से श्री गिरधारी लाल बुन्देला      

पूर्व पार्षद
4 निर्दलीय श्री राजेन्द्र शर्मा   

भू.पूर्व चेयरमैन
         चारों ही उम्मीदवार अपनी अपनी राजनीति का परचम लहरा रहे है। सभी अपने वोटरों को लुभाने के लिए अलग अलग तरह के पेतरे अपना रहे है। जगह जगह आम सभाए हो रही है और रात को 8 बजे के बाद  कुछ लोगों को तो मानों जन्नत ही मिल जाती है।  जन्नत का मतलब आप समझते है  उनका उसके बगेर खाना खाने का मन ही नहीं बनता और बनता है तो खाना हजम नहीं होता है। 
भाई अब तो समझ गये होगें ..... ऐसे लोगों की संख्या मुझे कुछ ज्यादा ही नजर आई बेचारे करें भी क्या  ये ही 5-7 दिन आते है इनके मजे के वो ये नहीं देखते की किस पार्टी के लोगों से मिल रही है उन्हें तो बस मिलनी चाहिए बस फिर मजे ही मजे है।
        अब देखना यह कि 18 अगस्त को होने वाले चुनाव में कौन बाजी मरता है। और कौन पछाड खाता है।  यह फैसला तो वोटर लोग ही कर पायेंगें
 मैं तो सिर्फ आनन्द ले रहा हूं और आपके साथ शेयर कर रहा हूं। क्योंकि मैं   तो ठहरा (गांव का) ग्राम पंचायत का आदमी  इसलिए अपना तो यहां वोट है नहीं, तो सोचा लोगो के नजारे देख आपके साथ शेयर कर लूं।
    आज कांग्रेस पार्टी के श्री राजेन्द्र प्रसाद कुमावत के समर्थन में एक जन सभा को आयोजन किया जा रहा है। जिसमें हमारे क्षेत्र के विधायक (मंत्री) श्रीमान बृजेन्द्र कुमार ओला पधार रहे है। उनके आने की खुशी और कांग्रेस के सर्मथन  में जो रैली निकाली जा रही है उसका परिदृश्य आपको दिखा रहा हूं।
सबका प्रचार का अपना अलग तरीका है।
आज सांय 5 बजे कांग्रेस पार्टी की मोटरसाइकिल पर झंडे लगाकर  रैली निकाली गई
एक बात ध्यान देने योग्य है वो है आज तक यहां नगरपालिका बोर्ड ज्यादातर भाजपा का ही रहा है। अबकी बार देखते है कि कौनसी पार्टी बाजी मरती है।
यह  है बसपा का कार्यालय जो मेरी दुकान के ठीक पिछे है
आज बस इतना ही आगे चुनाव परिणामों व के साथ  फिर आपके साथ ...

Sunday, August 1, 2010

मित्रता दिवस स्पेशल

दोस्तों आज मित्रता दिवस है। मित्रता दिवस पर आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार
आज कुछ नया न लिखकर मैं आप सभी को मित्रता दिवस की बधाई प्रेषित करना चाहुंगा  
इन्ही शब्दों के साथ
‘‘ प्रभु आप मुझको इतना तो दो
मेरे
हर दोस्त का घर खुशियों से भर दो ।।’’


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‘‘ हमारी जिन्दगी की तो बस यही एक  कहानी है
 
कुछ रब की कुछ यारों की मेहरबानी है।’’

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