सूचना

यह वेब पेज इन्टरनेट एक्सप्लोरर 6 में ठीक से दिखाई नहीं देता है तो इसे मोजिला फायर फॉक्स 3 या IE 7 या उससे ऊपर का वर्जन काम में लेवें

Wednesday, September 29, 2010

विचित्र प्रकार के हवा में उडने वाले सांप,हरे रंग के सांप

मैंने आज जब प्रातः अपनी दुकान खोली तो मैने देखा मेरी दुकान के नजदीक ही एक जगह कुछ लोग घेरा लगाये हुए खड़े थे मुझ से भी रहा न गया में भी वहा देखने चला गया कि क्या हुआ क्या बात हुई वहां जाकर देखा तो पता चला वहां तो एक बंगाली बाबू अपनी जड़ीबुटियों से बनी दवाईयां बेच रहा था इन लोगों के पास अपनी दवाइय बेचने का तरीका बहुत ही लाजवाब होता है इनको पता है वैसे तो इनके पास लोग ठहरने वाले नहीं हैं इसलिए तो ये लोगों के अपनी  जादुई बातों में उलझाये रखते है। और दूसरे ये कुछ इस प्रकार कुछ विचित्र जीव जन्तु अपने साथ रखते जिन्हें दिखाकर ये लोगों की भीड़ इकट्ठा कर सके उस बंगाली बाबू के पास भी ऐसा ही मिला लेकिन उसके पास जो जीव थे वे वास्तव में ही अजीबोगरीब थे।


           मैने देखा तो मुझ से रहा नहीं गया मैने तुरन्त अपनी दुकान से कैमरा निकाला और उनके फोटो खिंच लिए आपके साथ शेयर करने के लिए।ये जीव थे दो प्रकार के सांप
एक हरे रंग के सांप
और दूसरा भुरे रंग का सांप 
उडने वाला सांप

वो लोगों को इन सोपों की ख़ासियत बता रहा था इनमें हरे रंग का साप बहुत ही सुन्दर लंग रहा था और इसकी खासियत भी बहुत ही अजीबो गरीब थी उसके बताये अनुसार यह सांप बंगाल,हेदराबाद,आसाम के जंगलों में पाया जाता है। और वहां के हरे घास और कटिली झाड़ियो में छुपा रहता है। और यह सांप आवश्यकतानुसार अपना रंग भी बदल सकता है। तथा बहुत ही जहरीला होता है। ये सांप बहुत ही पतला था और ये अपनी पूंछ के बल पर तीन फिट तक खड़ा हो सकता है। ये वहां हरी घास में छुपा रहता है और किसी इंसान या जानवर द्वारा दब जाने  या छेड़े जाने वर उसे काट लेता है। और काटा गया जीव या इंसान तुरन्त मर जाता है।
आपने शायद कभी हपले हरा सांप देखा हो लेकिन मैने तो ये इस प्रकार का हरा सांप पहली बार देखा था इसलिए मुझ से रहा नहीं गया मैने तुंरन्तइनके फोटो खिंच लिए ताकि मेरी तरह अगर किसी भाई ने न देखे हो उनके साथ शैयर कर दिखा सकूं।
 उसके पास पहाड़ी बिच्छू भी थे जो बहुत ही जहरीले होते है। उनके भी फोटो दिखाये गये है।

दूसरी अजीबो गरीब चीज थी उसके पास ये उडने वाला सांप जिसका नाम वह पदम सांप बता रहा था
जी उसने बताय कि ये सांप हवा में खुले वातावरण में उड भी सकता हैं और उड कर ही अपना शिकार कर अपना पेट भरता है। ये ज्यादा तर आसाम और पहाड़ी इलाके में पाया जाता है। ये अत्यधीक जहरीला होता हे। इसके काटने पर व्यक्ति पानी भी नहीं मांगता ऐसा कहा जाता हैं इसके बारे में ये कितना सच है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं उसके बताये अनुसार ही आपको बता रहा हू।
कुल मिलाकर उसका ये हरा और उडने वाला सांप लोगों के कोतुहल का कारण बना हुआ था हरे रंग के सांप के उपर अजगर जैसी धारियां बनी हुई है। और एक सांप तो उसके पास बहुत ही बारिक है। जो हल्के भूरे रंग का है। उसे बहुत ही गोर करके देखने पर ही दिखाई देता है।
बाकि उसके पास जड़ी बुटियों से बनी दवाइयाँ थी और उन्ही जड़िबुटियों से बना तेला था जो वह बेच रहा था मै। तो इन सब दवाओं में विश्वास नहीं करता इसलिए मैने उनकी तरफ ज्यादा ध्यान न  देकर उन जन्तुओं की

तरफ ही ज्यादा ध्यान दिया
हालाकि बहुत से लोगों ने वो तेल खरीदा भी मेरा तो मानना है कि इस प्रकार किसी अनजान बीना जानकारी के खेल दिखाने वाले व्यक्ति से ये दवाइयाँ लेना एक मूर्खता का काम है। 


बस इतना ही आगे फिर मिलते है। कही नहीं जाइयेगा पढ्रते रहिएगा 

  किसी भी फोटो  को बड़ा करके देखने के लिए  उस पर डबल क्लिक करें


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

रेगिस्तान का जहाज एक नये अंदाज में

झुन्झुनूं जिले का गौरव बढ़ाने का जज्बा

कुण साथी

पत्थरी के रोग में बहुत उपयोगी है गोखरू

साया
लक्ष्य


Sunday, September 26, 2010

श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष में क्यों की जाती है, कौवे की मनुहार और आवभगत) ?

आजकल श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष चल रहा है। ) इनमें  एक चीज देखने को मिलती है। वह हैं कौवे की मनुहार और आवभगत। मन में हर बार यह सवाल उठता है। कि आखिर इन 15 दिनों में क्यों की जाती है। इस पक्षी की इतनी आवभगत वैसे तो हम बाकि दिनों में इस पक्षी को घर के पास फटकने भी नही देते है। और कंकर मार कर भगाते है। और न ही इसकी आवाज सुनना पसंद करते है।
 
 जब यह चालाक और कपटी कौआ घर में छोटे बच्चों के हाथों से छीनकर  ले जाता है।घर के बर्तन भाडो में अपना गन्दा मुँह देता रहता है। तो लोग इसे मारने को दौड़ते है। लेकिन इन दिनों में इस पक्षी की बहुत ही आवभगत होती है। इन दिनों में लोग कौवे को अपने घर बुलाकर  बढ़िया खाना खिलाते है।और यहां तक कि उसको खिलाये बगैर घर का कोई सदस्य भोजन नहीं करता घर की छत पर चढ़कर इस पक्षी को बुलाने के लिए आवाज लगाते है। (कागौस.. कागौस . इस तरह से कुछ...)हालाकि इन दिनों में कुछ लोग गऊ पूजा करते है 
 मेरे मन में सवाल उठा कि इन 15 दिनों क्या यह कौवा बुगला भगत बन जाता है। या फिर कोई देवता ?
 साल के  बाकि 340 दिन तो इसको सिवाय गालियों और कंकर मारने के कुछ भी नहीं मिलता 

मैने लोगों से पुछा भी परन्तु कोई सन्तोष जनक जबाब नहीं मिला सिर्फ ये ही कहा जाता हैं कि पुरखे जो करते आ रहे है वही हम करते है।और कुछ कहते है। हमारे पूर्वज कौवे के रूप में हमारे द्वारा दिया गया भोजन करने आते हैं 
      यह कहां तक सत्य है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन यह सवाल जरूर उठता हैं कि सभी के पूर्वज क्या कवै ही बनते है। सभी के पूर्वजों को मरने के बाद क्या कौवे की योनी ही मिलती है। अगर ये हमारें पूर्वज ही हैं तो हम इन्हें हर रोज प्रातः खाना क्यों नहीं देते है ? मारने क्यों दौड़ते है?  क्या करू मन तो मन हैं उसमें सवाल उठ खड़ा हुआ तो उठ खड़ा हुआ अब आप विद्वान लोगों से  विनती हैं। कृपया इसका सन्तुष्टि जनक उत्तर अगर आपके पास हो तो देवें जरूर। वैसे कोई गम्भीर समस्या भी नहीं हैं  इसमें इतना उलझने की कोई जरूरत भी नहीं श्राद्ध पक्ष में दुकान पर कोई काम तो हैं नहीं इसलिए मैने तो बैठे बैठे यह प्रश्न आपके सामने रख दिया 
अच्छा तो अब इजाजत.... 

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

रेगिस्तान का जहाज एक नये अंदाज में

रंगारंग सांस्कृतिक भजन संध्या जिसने सबका मन मोह लिया

चित्रकारी और शिल्प कला,का बेजोड़ नमूना बगड़ का मोती...

आकाल को आमंत्रित करते है ये टोटके

साया
लक्ष्य




Thursday, September 23, 2010

किसानों की उम्मीद पर फिरा पानी

इस बार इन्द्र भगवान इस तरह मेहरबान हुए कि अपने पिटारे (बारिश) को रोकने का नाम ही नहीं ले रहें है। इसका खामियाजा बेचारे जमीदार वर्ग (किसानों) को भुगतना पड़ रहा है।  उनकी मूंग, ग्वार (मोटे अनाज) की फसल तो पहले ही खराब कर चुका है। अब बाकि बची किसानों की आस बाजरे को भी गला,सड़ा दिया है।

उगे हुए तथा गले सड़े बाजरें के सिट्टे जैसे फोटों में दिखाये गये है। जिन लोगों ने  काट लिया है। उनके तो सिट्टे गल सड़ गये है। और जिन्होंने नहीं काटा है। उनके खडे पौधे  पर ही सिट्टे में नया बाजरा उगने लगा हे। आब बेचारे करें भी तो क्या लगातार बरसता पानी  और पकी खड़ी फसल सर पर करे तो क्या करे? सिवाय भगवान को कोसने के कुछ कर भी तो नहीं सकते है। हालांकि अबकी बार फसल की लगत बहुत अच्छी थी और पैदावार भी अच्छी हुई थी लेकिन यह तो वही बात हुई ‘‘ थाली में परोसने के बाद हाथ से निवाला छिन लिया’’ भगवान ने । किसान बेचारे जिनकी आस यह बाजरा और इसकी कड़की (पुले) थे बाजरा तो खराब हुआ ही हुआ कड़बी भी गल गई

यह बाजरा न तो खाने लायक रहा और न ही इसे पशु खा पायेगें  यह हाल हमारें यहा के आस पास सभी गांवों में है। लगता है इससे महगाई और भी बढेगी परन्तु कर भी क्या सकते है। यह तो प्रकृति है। देती है तो छप्पर फाड़ के देती हे। और लेती हैं तो भी छप्पर फाड़ के लेती है। देवा रे देवा....
सबसे ज्यादा समस्या कड़बी गलने से पशुओं के चारे की हो सकती है। अगर अब यह बारिश न थमी तो पशुओं के चारे के भी लाले पड़ जायेगे।
एक बात और है। इस खराब हुए बाजरे को काटने के लिए लोगों को मजदूरी और उपर से देनी पड रही है। और हाथ कुछ नहीं लगने वाला
ये जो सिट्टे दिखाये गये है। इनमें सिट्टे में ही बाजरा दुबारा उग आया है। और सिट्टा गलने लगा है। अब इसी आशा के साथ बैठे हैं बेचारे किसान कि कब मेघा रुके और कब पशुओं के लिए तो चारा बटोरना है।
सिट्टे में उगा नया बाजरा
  किसी भी फोटो  को बड़ा करके देखने के लिए  उस पर डबल क्लिक करें


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

प्राकृतिक छटाएं (दृश्य) जो मन को मोह ले

रंगारंग सांस्कृतिक भजन संध्या जिसने सबका मन मोह लिया

पत्थरी के रोग में बहुत उपयोगी है गोखरू

साया
लक्ष्य

 

 

Wednesday, September 22, 2010

बाजरे का एक पौधा जिसके 35 सिट्टे

 अगर प्रकृति देती है तो छप्पर फाड़ के देती इस पौधे को देखने से यही कहावत चरितार्थ होती है।
जी हां यह मजाक नहीं सच है हमारे खेत में जो हमारे गांव मालीगांव में है। उसमें इस प्रकार के तीन चार पौधे है। जिनको 15 - 20 से ज्यादा सिट्टे है।
और एक पौधा तो ऐसा है कि उसके 35 सिट्टे है।और इन सिट्टों में दाने (बाजरा) भी बहुत अच्छा लगा हुआ है।और इन पौधों की लम्बाई भी 10- 12 फिट है।
और यह पौधा कोई शंकर  बाजरे के बीज का नहीं  है। अपने यहाँ के ही देशी बाजरे  का है। 
 (जखराना बाजरा)
मैं किसी कम्पनी के बीज का प्रचार नहीं कर रहा हूं जो हकीकत है वही दिखा और बता रहा हूं।
 अगर हमारा कृर्षि विज्ञान इस प्रकार के उन्नत बीज का सही ढ़ग से उत्पादन करें तो हमें शंकर बीज बोने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी अगर इतने अधिक सिट्टे होंगें तो पैदावार भी ज्यादा होगी
 हालाकि  शंकर बीज की फसल  जल्दी  तैयार  होती है। अगर वैसा ही फार्मूला इस बीज के साथ लगाया जाये तो इसकी पैदावार का तो कहना ही क्या और बीज देशी का देशी जो खाने में भी स्वादिष्ट होता है।
वेसे अमूमन इस बीज के सभी पौधों   जिसको 5-6 सिट्टे जरूर आते है।
 और इस बीज की कड़बी भी लम्बी होती है।
और शंकर बीज की कड़बी  की बजाय इस कड़बी को पशु खाते भी ज्यादा चाव से है।
मैं यह नहीं कहता कि शंकर बीज बेकार है मेरा कहने का मतलब यह है कि अगर इस बीज में थोड़ा शोध किया जाये तो यह बीज अच्छी पैदावार दे सकता है।

एक तरफ जहां कम समय  में फसल तैयार करने के लिए  शंकर बीज का प्रयोग किया जा रहा है।  वहीं गांवों में अभी भी देशी बीज का बजरा ही बोया जाता है। गांव वालों का कहना है कि देशी बीज तो देशी ही रहेगा
 और बुढ़े  बुर्जुगों का  कहना हैं कि  ‘‘अगर देशी बाजरे की रोटी हो और ग्वार फली का साग हो तथा खाटे की राबड़ी हो तो खाने का मजा ही कुछ और है।’’



उनका कहना है कि ‘‘ यो जखराणा को बजरों है भाया कतरों बड़ो बद ज्या कोई कुनी बता सके अर कतरा सिटा निकाल दे कुछ कहयो नही जा सके है। ’’ 
 बस इसको को पानी भरपूर मात्रा में चाहिए
फिर इसकी पैदावार के मजे ही मजे है। 
अगर कोई इसे देखना चाहता है तो मेरे घर आकर देख सकता है। पांच चार दिन में बाद में इसे काट दिया जायेगा। क्योंकि यह अब पुरी तरह पका हुआ है।  

अब इजाजत फिर मिलते है किसी नई जानकारी के साथ


 किसी भी फोटो  को बड़ा करके देखने के लिए  उस पर डबल क्लिक करें

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

रंगारंग सांस्कृतिक भजन संध्या जिसने सबका मन मोह लिया

कुछ यादे गांधीजी के समय की -बाबू के जी महेश्वरी Memory with Bapu -K.G.Maheshwari


साया
लक्ष्य

Monday, September 20, 2010

प्राकृतिक छटाएं (दृश्य) जो मन को मोह ले


बगड़ नगर की प्राकृतिक छटा जो एक पल के लिए देखने वाले का मन मोह ले


मै आपको बगड़ नगरी का प्राकृतिक नजारा दिखाने जा रहा हूं जिसको मैने बारिश के बाद अपने केमरे में कैद किया है। बारिश के बाद का यह दृश्य बहुत ही मन मोहक लग रहा था मैने मेरी दुकान के उपर की टेरिस पर जाकर ये फोटो लिये जहां से पुरा बगड़ दिखाई देता है।


और आप पास के गांव भी दिखाई देते है। बगड़ नगरी हरी भरी वादियों में घिरी बहुत सुंदर लग रही थी
शायद धुँध मय मौसम होने के कारण फोटों इतने अच्छे न आ पाये हो लेकिन आखों  से यह नजारा बहुत ही मन मोहक लग रहा था

आखों को मनोरम लगने वाला यह दृश्य किसी जन्नत से कम नहीं था  ऐसा मन कर रहा था कि अगर पंख होते तो उड़ कर इस छटा का मौसम का आनन्द उठा सकूं
चारों तरफ से हरे पेड़ों से घिरी ये नगरी ऐसे लग रही थी मानों  कश्मीर की वादिया यहां ही आ गई है।

सन् 1928 में निर्मित बगड़ का प्रवेश द्वारा कहा जाने वाला यह पीरामल गेट भी अति सुन्दर लग रहा था





किसी भी फोटो को बड़ा करके देखने के लिए उस पर डबल क्लिक करे।

Monday, September 13, 2010

रंगारंग सांस्कृतिक भजन संध्या जिसने सबका मन मोह लिया

पीरामल गेट बगड़ के पास स्थापित श्री गणेश प्रतिमा स्थल पर आयोजित एक विशाल भजन संध्या यहा पर मैं पहले बता चुका हूं कि श्री माधोपुर के श्री विनोद छैला एण्ड पार्टी ने बहतु ही सुन्दर व शिष्ट भजनों तथा अपनी कॉमेड़ी द्वारा लोगों का मन लुभाया इनकी पार्टी में आई लेडीज कलाकारों ने बाबा के भजनों के उपर बहुत ही सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया जो कि फोटों में साफ दिखाई दे रहा है।
( हालाकि इन लेडीज कलाकारों का रोल अदा किया था लड़कों ने ) लेकिन कोई मजाल कि यह बता सके ये लड़कियां नहीं थी सारी जनता इन्हें लड़कियां ही समझ रही थी भई बात ही ऐसी थी उनमें एकदम लेडीज से मिलती आवाज और एकदम लडकियों से मिला ही उनका बदन और पहनावे को इस ढ़ग से पहना गया कि एक बार तो भगवान भी धोखा खा सकते थे ये दोनों कला कर किसी स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं लग रहे थे विशेष कर इन्ही कलाकारों ने इस हजारों की जनता का मन मौह रखा था
मोहते भी कैसे नही इनकी अदाये भी वास्तव में मानने लायक थी क्या कला थी इनमें ढोलक की थाप पर लचकता बदन बैंजो (वाद्ययंत्र) की झनक पर मटकती इनकी कमर तथा नयन और ये जो मुछल बाबा दिख रहे है न इनकी कॉमेडी का तो जवाब नहीं

मैं अगली पोस्ट में इनकी कॉमेडी की आपको एक विडियों झलक दिखाउगां इनकी कॉमेडी राजस्थान क्या लगभग पुरे भारत में प्रसिद्ध है। नृत्य कलाकारों तथा विनोद जी की कॉमेडी का ऐसा तालमेल बैठा की जनता

ने प्रातः 3 बजे तक हिलने का नाम तक नहीं लिया अगर आप भी इनका ये कार्यक्रम देखते तो आप भी दांतों तले अँगुली दबाने के लिए मजबूर हो ही जाते ये मेरा दाबा रहा । हालाकि कुछेक लोगों को ही पता था के ये कलाकर लेडीज नहीं लड़के है जो लेडीज की आवाज और वेशभूषा पहन कर अपनी अदाये दिखाकर लोगों का मन लुभा रहें है।
सब ने गणपति जी को मिलकर ऐसा रिझाया कि प्रातः 3.20 बजे इन्द्र भगवान को उनके स्वागत में बरसात करनी पड़ गई

आपको यह बता दूं कि यह दोनों प्रोग्राम हर वर्ष आयोजित किये जाते है। 
हर वर्ष अलग अलग पार्टियों द्वारा भजनों के कार्यक्रम करवायें जाते है।
रथ पर सजी महाराज गणेश जी की मूर्ति

वहीं दूसरी तरफ का नजारा भी कोई कम नहीं था वहां भी एक नन्ही सी लेडीज कलाकार ने सभी को अपनी मधुर कोकिल स्वरी आवाज से लुभा रखा था सभी बाबा के भजन तथा माता की  भेंट  बड़े ही सुन्दर भाव से बैठकर सुन रहे थे। ऐसा लग रहा मानो भजन रूपी  स्वरों की गंगा बह रही है और सब मग्न होकर उसमें डुबकी लगा रहे हों । लगाते भी कैसे नहीं माहौल ही ऐसा ही बना हुआ था।  कोई दुर्भाग्यशाली ही होगा यहाँ जिसने ऐसे मधुर आनन्द का मजा न उठाया होगा
तो अब मुझे दीजिए इजाजत कल मैं फिर हाजिर होउगा आपके सामने आज सांय 4 बजे इन्हीं दोनों प्रतिमाओ के तालाब विर्सजन की झांकी को लेकर मेरी यही कौशिस रहती जितना हो सके आप लोगों को भी यहाँ पर होने वाले हर कार्यक्रम की खबर आप तक पहुचाता रहूं आपके साथ शैयर कर सकूं मैं चाहूंगा आपका आशीर्वाद हमेश मेरे उपर बना रहें इन्ही आशाओं के साथ...

पेश अगली पोस्ट इन सब मन मोहक दृश्यों  की विडियों के साथ

किसी भी फोटो  को बड़ा करके देखने के लिए  उस पर डबल क्लिक करें


 गणपति बप्पा मौरया अबके बरस तूं जल्दी आ
रेगिस्तान का जहाज एक नये अंदाज में
साया
लक्ष्य

मन मोहक नजारा श्री गणेश चतुर्थी उत्सव पर सजाई गई मूर्तियां


मैने वादे के मुताबिक एक बार फिर हाजिर हूं आपके सामने श्रीगणेश चतुर्थी पर हुए कार्यक्रम की फोटो तथा कार्यक्रम की छलकिया आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं 

आज रात पीरामल गेट के पास अयोजित श्रीगणेशमहोत्सव कार्यक्रम के दौरान श्री गणेश जी की प्रतिमा को बहुत ही अच्छे ढ़ग सजाया गया जिन्हे देखकर हर कोई मन्त्रमुग्ध हो सकता था नजारा बहुत ही सुन्दर दिखाई दे रहा था यहा पर बगड़ नगरीया में दो जगह यह गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है।। एक पीरामल गेट केपास श्री गणेश महोत्सव समिति के द्वारा जो हमारे मार्केट में मेरी दुकान के पास है। और दूसरी बगड़ बी.एस. चौक के पास स्थित चैमालों



के मोहल्ले में दोनों ही जगह रात को विशाल भजन संध्या का आयेजन किया गया तथा आरकेस्ट्रा पार्टी यों द्वारा  श्री  गणेश जी के भेजनों की स्वर गंगा प्रवाहित करवाई गई बगड़ नगर के लोगों के अलावा आस पास के गांवों के लोगों ने भी श्री गणेश जी के दर्शन कर भजनों का लाभ उठाया 



दोनों जगह दर्शनों तथा भजनों का रसपान करने के लिए काफी भीड़ जमा हुई । पीरामल गेट के पास हुए कार्यक्रम में श्री माधोपुर के विनोद छैला एण्ड आरकेस्ट्रा पार्टी ने जगकर धुम मचाई तथा अपने मधुर कंठो द्वारा स्वर लहरी गंगा प्रवाहीत कर दर्शकों को एक जगह से हिलने तक का मौका नहीं दिया  और बीच बीच में कॉमेडी की फुहारें भी लोगों को गुदगुदाने के लिए काफी प्रयाप्त मात्रा में छोड़ी गई जिन्हे सुनकर लोग गदगद हो गये।




पीरामल गेट के पास श्री गणेश महोत्सव समिति द्वारा सजाई गई श्री गणेश प्रतिमा।

दूसरी तरफ बील. चोक के नजदीक स्थापित प्रतिमा स्थल पर मण्डावा फतेहुपर तथा झुन्झुनूं की पर्टी ने भी जमकर धूम मचाई और श्री गणेश वन्दना के साथ  माता रानी के भेटें सुनाई यहां पर एक सुन्दर गैलरी  तथा प्रतिमा स्थल मण्डप को सजाय गया प्रमिता स्थल मण्ड बहुत ही सुन्दर लग रहा दौनों घोड़ों के साथ श्री गणेश जी की प्रतिमा एसी लग रही थी मानों अब बोल पड़ेगी तथा अपने रथ को हाकते हुए बगड़ का भ्रमण करने को निकल पड़ेगी गणपति बप्पा मौरया के जयकारों  साथ साथ मधुर कर्णप्रिय बाबा के भजनों का लुफ्त कौन नहीं उठाना चाहता सौ माताए बहने बुढै जवान सभी ने इन भजनों का भरपूर आनन्द उठाया
 यहां सजाई गई गैलरी ही लोगों का  मन लुभानें के लिए काफी थी प्रतिमा सजावट का तो कहना ही आप खुद देख सकते है।

 
आज दोनों ही प्रतिमाओं को सायं 4

 बजे विशाल झांकियों द्वारा बगड़ के फतेह सागर तालाब में जयकारों के साथ विर्षजित किया जायेगा जिसकी विड़ियों क्लिप मैं आपको कल की पोस्ट में जरूर दिखाउगां और इसके साथ कल की पेस्ट में आज रात हुए प्रोग्राम्स की विडियों क्लिप भी मैं आपको जरूर दिखाउगां

चैमालों के मौहल्ले में  सजाई गई श्री गणेश प्रतिमा



इसके बाद मैं आपके सामने यहां हुए रात्री कार्यक्रमों की फोटों झलकिया अगली पोस्ट में दिखाने जा रहा हूं।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...